फरीदकोट(मितल):- स्थानीय अनाज मंडी में गेहूं की फसल पिछले कुछ दिनों से आना शुरू हो चुकी है और अब मंडी में फसल काफी मात्रा में आ चुकी है। परन्तु सरकार खरीद शुरू न हो पाने के चलते किसानों को मंडियों में परेशान होना पड़ रहा है। जबकि दूसरी ओर केन्द्र सरकार द्वारा विभिन्न कैटेगरी के तहत गेहूं की खरीद करने की बात की गई है। परन्तु इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट न हो पाने के कारण आढ़तिए और किसान दोनों की उलझन में हैं।उल्लेखनीय है कि अनाज मंडी में मार्केट कमेटी द्वारा किए जाने वाले प्रबंध तो पूरे कर लिए गए हैं। परन्तु खरीद के बारे में अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार की एजेंसी एफसीआई द्वारा क्वालिटी डैमेज कट 5 रुपए 31 पैसे से लेकर 31 रुपए 87 पैसे तक निर्धारित कर दिए गए हैं। इसमें 24 तरह की कैटेगरी बनाई गई है। परन्तु किस तरह का अनाज किस रेट पर खरीदा जाएगा इसे लेकर असमंजस बरकरार है।जबकि खरीद एजेंसियों के पास भी गेहूं की नमी की जांच करने के लिए तो मशीनें हैं परन्तु जो श्रेणियां खरीद नियमों की बनाई गई हैं उनकी जांच कौन करेगा और कैसे करेगा यह भी एक बड़ा सवाल है। क्योंकि इसके लिए कोई अलग से विशेषज्ञ नहीं है और इनकी जांच भी खरीद एजेंसियों के इंस्पेक्टरों द्वारा ही की जाएगी।अब तक आई गेहूं की फसल में से एफसीआई को सैंपल भेजे जा चुके हैं और उनके द्वारा ही गेहूं की खरीद को किसी श्रेणी में रखा जाएगा इसके मानक तय किए जायेंगे। इन सैंपलों की रिपोर्ट कल तक आने की उम्मीद है और उसके पश्चात एजेंसियों के इंस्पेक्टरों को इसकी जानकारी दी जाएगी और फिर खरीद शुरु हो पाएगा। जबकि अनाज मंडी में गेहूं की ढेरियों की संख्या बढ़ती जा रही है।उधर मंडियों में अपनी गेहूं की फसल लाने वाले किसान भी परेशान है। किसानों का कहना है कि पहले तो मौसम की मार से ही वे उबर नहीं पा रहे हैं दूसरा अब मंडियों में भी उनकी फसल की खरीद न होने के चलते उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि एक-दो दिन और फसल की खरीद शुरू नहीं होती तो फिर मंडी में फसल रखने की जगह भी नहीं बचेगी। ऐसे में बाद में फसल काटने वाले किसानों को और भी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।इस संबंध में आढ़तिया एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलभूषण राय एवं कोषाध्यक्ष महिंदर बांसल का कहना है कि सरकार द्वारा जो श्रेणी के अनुसार कट फिक्स किए गए हैं उनके चलते काम उलझेगा और किसानों तथा आढ़तियों को भी परेशानी होगी। जबकि यदि सरकार निर्धारित मूल्य में फिक्स मूल्य कम करती तो असमंजस की स्थिति न रहती। उन्होंने कहा कि ऐसे आढ़तिए को गेहूं की फसल का मूल्य पता नहीं चलेगा और वह किसान को क्या बताएगा। ऐसे में उनके बीच भी समस्या पैदा होगी। उधर इस संबंध में डीएफएससी वंदना कंबोज का कहना है कि एफसीआई की रिपोर्ट कल तक आने की उम्मीद है और उसमें तय किए गए मानकों के अनुसार गेहूं की खरीद शुरू करवा दी जाएगी।
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