ड्रा की ड्रामेबाजी: 17 लाइसेंस लेकर व्यापारियों ने बर्ल्टन पार्क में सजा ली 100 दुकानें
प्रति दुकान 45 से 65 हजार रुपए नेता जी ने लिए
निगम का हिस्सा भी तय था, हर नेता के घर दीवाली लेकर पहुंचे व्यापारी
जालंधर ( नवीन पुरी ) : महानगर में हर साल की तरह इस साल भी पटाखों की बिक्री में नियम छिक्के पर टांग दिए गए। एक आंकड़े के मुताबिक जालंधर जिले में करीब 15 करोड़ के पटाखे बिके। आंकड़ा तो पटाखे बिकने का है लेकिन नेता और अफसर कितने में बिके ये पता नहीं चला है। वैसे शोर तो हर बूथ के पीछे प्रति परसटेंज का मचा है। 20 व्यापारियों के नाम ड्रा निकले थे और ड्रा के लिए करीब 100 आवेदन आए थे। नियमानुसार 20 व्यापारियों को ही दुकानें खुलने की इजाज थी। हालांकि एक एफआईआर के कारण एक लाइसेंस कैंसिल हो गया लेकिन जब बर्ल्टन पार्क में दुकानें सजने की बारी आई तो सेंट्रल हलके के नेता जी अपने लाव लश्कर के साथ मौके पर पहुंच गए और उनके पीछे पीछे वेस्ट हलके के नेता जी भी पहुंच गए। इसके बाद शुरू हुआ सैटिंग और परसटेंज का खेल। इस खेल में करोड़ों रुपए इधर से उधर हुए। हालांकि लाइसेंस जारी करने में देरी के चलते दो व्यापारियों ने इस बार पटाखे बेचने से तौबा कर ली। एक पर पर्चा दर्ज होने के बाद अधिकारिक तौर पर 17 दुकानें ही सज सकी। जहां पर पटाखों की थोक व रिटेल बिक्री की गई।
कुल 126 दुकानें सजी थीं बर्ल्टन पार्क में
एक आंकड़े के मुताबिक लाइसेंस के लिए 126 लोगों ने अप्लाई किया था और बूथ भी 126 सजे थे। यानि ड्रा की सिर्फ ड्रामेबाजी हुई जबकि जिस जिस ने अप्लाई किया उसे उसके या उसके किसी परिचित के नाम पर पटाखे बेचने का लाइसेंस दे दिया गया।
चार प्रधानों ने किया सबका बंटाधार
पटाखा मार्केट पर इस बार चार प्रधानों ने कब्जा किया हुआ था। इस कारण हर प्रधान ने अपनी मनमर्जी चलाई। हर प्रधान ने मनमर्जी चलाते हुए सिर्फ अपने बंदों का मुनाफा सोचा। नेताओं को पैसे दिए और जमकर मुनाफा कमाया। दुकानें बेशक लेट से शुरू हुई लेकिन टीन की शैडों वाले बंद बूथों में पटाखा पहले ही स्टोर कर लिया गया था।
शैड से लेकर एक कील तक तक की अवैध वसूली के चर्चे
सूत्रों के मुताबिक सबसे पहले 20 दुकानों के बदले 45 हजार रुपए प्रति दुकान नेता जी ने रेट तय किया। इसमें निगम का हिस्सा भी तय और बाकी छोटे मोटे खर्चे यानि शैड व बिजली। फिर जब दीपावली के बिल्कुल पास के दिनों में पटाखा मार्केट नहीं सजी तो व्यापारी परेशान हो गए। व्यापारियों की परेशानी को आप, भाजपा और कांग्रेस नेताओं ने कैश किया और प्रति दुकान कीमत 65 हजार रुपए तक पहुंच गए। 100 दुकानों को आप 65 हजार से गुणा करें तो कीमत में कितने शून्य लगेंगे आप खुद जान सकते हैं।
इस पॉलिसी के कारण व्यापारियों पर आया दबाव
12 अक्टूबर को निकाले ड्रा के बाद 20 अक्टूबर देर शाम को लाइसेंस जारी किए गए। इसके लिए कभी नगर निगम को दुकान का किराया जमा करवाने की पर्ची लाने तो कभी फायर ब्रिगेड से मंजूरी लेने का प्रविधान तय करने के साथ-साथ सियासी दबाव भी इसका एक कारण रहा। इस बीच पटाखा व्यापारियों की परेशानी बढ़ गई थी। इसी कारण ड्रा निकाले जाने के बाद भी 2 व्यापारियों ने पटाखा बेचने से तौबा कर ली।
नेताओं के घर पहुंची व्यापारियों की दीवाली
दीवाली से 1 रात पहले तक व्यापारियों ने जमकर पैसे कमा लिए और नेताओं की रिश्वत का खामियाजा भुगता जनता ने। जनता को जो पटाखे पिछले साल 1000 रुपए में मिले थे उसके लिए जनता को इस बार 3 हजार रुपए चुकाने पड़े क्योंकि व्यापारियों ने पटाखे की कीमत में नेताओं और अफसरों की कीमत जोड़कर एमआरपी बढ़ा दी थी। अब जनता बेचारी क्या करती महंगे पटाखों से ही दीवाली मनानी पड़ी।
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