शिरोमणी अकाली दल की सरकार ने हमेशा शांति और साम्प्रदायिक सदभावना को राज्य की नीति की आधारशिला बनाया : सरदार सुखबीर सिंह बादल

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आप पार्टी के कार्यकाल के दौरान राज्य में धार्मिक झड़पें हुई और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई

कहा कि भगवंत मान ने अपने हलके के लिए कुछ नही किया और यही वजह कि लोग आम आदमी पार्टी का विरोध कर रहे

मलेरकोटला/15 जून: शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल ने आज कहा है कि पूर्ववर्ती अकाली दल की अगुवाई वाली सरदार परकाश सिंह बादल ने शांति और साम्प्रदायिक सदभाव को राज्य की नीति की आधारशिला बनाया था, इसीलिए उस समय पंजाब ने समाज के सभी वर्गों के बीच पूर्ण शांति देखी , जबकि आम आदमी पार्टी के छोटे से कार्यकाल के दौरान धार्मिक झड़पे हो रही और कानून व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह से बिगड़ गई है।

अकाली दल अध्यक्ष मोहाली कलां, नोढ़ारानी, शेखूपुर कलां, झनेर और मलेरकोटला पर शिअद-बसपा और सभी पंथक संगठनों के संयुक्त उम्मीदवार के समर्थन में रैलियों को संबोेधित कर रहे थे।

सरदार बादल ने कहा कि बीबा राजोआणा की उम्मीदवारी का चुनाव काफी सोच विचार के बाद किया गया है। उन्होने कहा कि ‘‘ चुनावों से पहले हमने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से अपील की थी कि वे केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार सभी सिख बंदियों को रिहाई कर भाई बलवंत सिंह राजोआणा की फांसी की सजा के साथ साथ अन्य की उम्रकैद की सजा को कम कर रिहाई का मार्ग प्रशस्त करें। जब ऐसा नही हुआ तो हमने एक संयुक्त उम्मीदवार को मैदान में उतारने के मकसद से सभी पंथक संगठनों से संपर्क किया, जिसके कारण इस सीट से बीबा राजोआणा को चुनाव के लिए मैदान में उतारा गया ।

सरदार बादल ने लोगों से अपील की कि वे सिख बंदियों के परिवारों को उनके परिवारों से फिर से जुड़ने का एक अवसर दें। उन्होने कहा कि बीबा राजोआणा के चुनाव के परिणामस्वरूप उन बंदियों को रिहा कर दिया जाएगा जो दशकों से सजा पूरी होने के बाद भी जेल में बंद हैं । उन्होने उदाहरण दिया कि कैसे भाई बलवंत सिंह राजोआणा 28 साल से जेल में बंद हैं और उन्हे रिहा नही किया जा रहा है, भले ही सुप्रीम कोर्ट ने बार बार केंद्र से कहा तथा 2012 में शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (एसजीपीसी) द्वारा उनकी और से दया क्षमादान याचिका पर निर्णय लेने के लिए कहने के बाद भी उन्हे छोड़ा नही जा रहा है। उन्होने इस अवसर पर आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की भी निंदा करते हुए कहा कि उन्होने उस फाइल पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर रहे हैं , जिसमें पिछले सात महीनों में प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर की रिहाई के मामले की मंजूरी दे दी गई थी।

सरदार बादल ने आप पार्टी और उसके मुख्यमंत्री भगवंत मान के बारे में बात करते हुए कहा कि वह अपने संसदीय क्षेत्र में नही आ रहे हैं , क्योंकि उन्हे विरोध प्रदर्शन से डरते हैं। उन्होने कहा, ‘‘ हमने देखा है कि कैसे लोगों ने आप पार्टी को धुरी में चुनाव कार्यालय भी नही खोलने दिया। यह सब इसीलिए हो रहा है क्योंकि श्री भगवंत मान ने अपने संसदीय क्षेत्र के लिए कुछ भी नही किया है, नए काम तो भूल ही जाइए, चल रहे कार्यों को भी रोक दिया गया है’’।

इससे पहले अकाली दल अध्यक्ष ने बाबा हैदर शेख जी की दरगाह पर भी माथा टेका। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए सरदार बादल ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अकाली दल (अमृतसर) के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान कांग्रेस पार्टी के साथ सिद्धू मूसेवाला की निर्मम हत्या का राजनीतिकरण कर रहे हैं। इससे पीड़ित परिवार की भावनाओं को ठेस पहुंची है। सभी को इस तरह के आचरण से बचना चाहिए’’।

बीबा राजोआणा ने भी हलके में अलग से प्रचार किया। उन्होने यह स्पष्ट किया कि वह एक राजनीतिज्ञ नही हैं, वह केवल भाई राजोआणा को छुड़ाने के लिए चुनाव में खड़ी हुई हैं, जिन्हे 28 साल से और अन्य सिख बंदियों को जेल में बंद कर दिया गया । उन्होने कहा, ‘‘ आपका हर वोट दिल्ली को सिख बंदियों को रिहा करने की आवश्यकता का संकेत देगा’’। उन्होने कहा, ‘‘ पहले खालसा पंथ सिमरनजीत सिंह मान को 1989 में बड़े अंतर से लोकसभा के लिए चुनकर जेल से आजाद करने के लिए एकजुट हुआ था।

आज चुनाव प्रचार करने वाले नेताओं में इकबाल सिंह झूंदा, नुसरत अली खान (बग्गा), दर्शन सिंह शिवालिक, गुरचरण सिंह ग्रेवाल, एस आर कलेर, विरसा सिंह वल्टोहा और करनैल सिंह पीरमोहम्मद, परमजीत सिंह ढ़िल्लों और यादविंदर यदु शामिल थे।

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